Monday, September 27

चिपको आन्दोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना से हुआ निधन , AIIMS में ली आखड़ी साँस

94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया

चिपको आंदोलन के प्रमुख नेता सुदंरलाल बहुगुणा का 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.ये जानकारी ऋषिकेश एम्स की तरफ से दी गई है. एम्स में उनका इलाज चल रहा था. चिपको आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह 94 साल के थे. कोरोना संक्रमण के बाद से वह ऋषिकेश एम्स में भर्ती (Admitted In Rishikesh AIIMS) थे. अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक ऑक्सीजन काफी कम हो गया था जिसकी वजह से उनका निधन हो गया आज दोपहर 12 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

1970 में की चिपको आंदोलन शुरुआत

बचपन से सोशल साइंस की किताबों में जिनकी बाड़े में बताया गया ,हिमालय के रक्षक सुंदरलाल बहुगुणा , इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि चिपको आंदोलन थी ,सुंदरलाल बहुगुणा का मानना था कि पेड़ों को काटने की अपेक्षा उन्हें लगाना हमारे जीवन के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्होंने 1970 में गढ़वाल हिमालय में पेड़ों को काटने के विरोध में आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन का नारा – “क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार। मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार” तय किया गया था। वर्ष 1971 में शराब दुकान खोलने के विरोध में सुन्दरलाल बहुगुणा ने सोलह दिन तक अनशन किया।

गढ़वाल हिमालय में पेड़ों के काटने को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन बढ़ रहे थे। सुंदरलाल बहुगुणा ने गौरा देवी और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर जंगल बचाने के लिए चिपको आंदोलन की शुरूआत की थी। 26 मार्च, 1974 को चमोली जिला की ग्रामीण महिलाएं उस समय पेड़ से चिपककर खड़ी हो गईं जब ठेकेदार के आदमी पेड़ काटने के लिए आए। यह विरोध प्रदर्शन तुरंत पूरे देश में फैल गए। महात्मा गांधी के अनुयायी रहे बहुगुणा ने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए कई बार पदयात्राएं कीं।

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