Tuesday, March 2

दिल्ली में मकान बनाने वाले हैं तो ध्यान दे. नए नियम, सर्टिफ़िकेट, और मंज़ूरी की प्रक्रिया में हुआ UPDATE

दिल्ली में पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण की बाधाएं दूर होने जा रही हैं। एकीकृत भवन उपनियम 2016 में संशोधन की सिफारिश पर उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मंजूरी दे दी है। जल्द ही तमाम संशोधन अधिसूचित कर दिए जाएंगे। इसके बाद पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए पूर्व अनुमति लेना जरूरी नहीं होगा।

गौरतलब है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से एकीकृत भवन उपनियम 2016 में कुछ संशोधनों की सिफारिश की गई है। प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक अब कोई भी सरकारी एजेंसी या संगठन ग्रीन बिल्डिंग यानी पर्यावरण अनुकूल भवन का निर्माण कर सकता है। इस दिशा में एयर प्यूरीफायर, सोलर पैनल, 25 वर्ग मीटर तक वर्टिकल गार्डन, सार्वजनिक शौचालय और छोटे स्माग टावर बिना किसी पूर्व अनुमति भी तैयार किए जा सकते हैं। स्माग टावर का आकार अगर बहुत बड़ा है तो ही दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन (डीयूएसी) से मंजूरी लेनी होगी।

 

समग्र पर्यावरण गुणवत्ता में सुधार के लिए ग्रीन ब्लू संरचना का विकास एक और मुख्य विशेषता है। ब्लू इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे जल निकायों, झीलों, नालियों और हरित इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सभी प्रकार के ग्रीन क्षेत्रों (भवन के अंदर और बाहर हरियाली सहित) का एकीकरण भी अब ले-आउट तैयार करने और भवन डिजाइन का ही एक हिस्सा होगा। यह प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग में मदद करेगा।

इसके अलावा अब भवन का मालिक, सरकारी एजेंसी अथवा संगठन संबंद्ध प्राधिकारी से पूरा भवन तैयार हुए एक ब्लाक के लिए भी आंशिक प्लिंथ प्रमाण पत्र प्राप्त कर उसे शुरू कर सकता है.

 

कंप्लीशन सर्टिफिकेट के बिना किसी भी नए भवन का उपयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन अब आंशिक तौर पर भी यह प्रमाण पत्र लेना और उसका इस्तेमाल करना संभव होगा। यह सुविधा पहले उपलब्ध नहीं थी। इन सभी संशोधनों को डीडीए अध्यक्ष और उपराज्यपाल अनिल बैजल ने हरी झंडी दिखा दी है। जल्द ही इन्हें केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रलय द्वारा अधिसूचित कर दिया जाएगा।

डीडीए की अतिरिक्त योजना आयुक्त मंजू पॉल के मुताबिक पर्यावरण संरक्षण आज राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अनिवार्य हो गया है, इसीलिए एकीकृत भवन उपनियमों 2016 में संशोधन का मसौदा तैयार किया गया। उपराज्यपाल की स्वीकृति के बाद जल्द ही इन पर अमल शुरू हो जाएगा। इससे निजी और सरकारी दोनों ही स्तरों पर पर्यावरण अनुकूल भवन निर्माण को प्रोत्साहन भी मिलेगा।

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