Monday, October 26

भारत में कोरोना को धर्म से जोड़ के देखा जाएगा, चैनल वाले वैसे ही चलेंगे, सुप्रीम कोर्ट ने सुनने तक से मना किया

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और अन्य अथॉरिटीज को कोरोना मरीजों की पहचान धर्म के आधार पर नहीं करने के निर्देश देने की मांग करने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

 

 

 

दिल्ली निवासी दो याचिकाकर्ताओं ने मार्च में निजामुद्दीन मरकज के सम्मेलन में शामिल हुए तब्लीगी जमात के लोगों का मुद्दा उठाते हुए यह याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा था कि तब्लीगी जमात की घटना के आधार पर पूरे एक समुदाय पर आरोप लगाया गया।

 

 

 

शुक्रवार को यह याचिका जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगी थी। पीठ ने मामले पर विचार करने से इन्कार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने ऐसी ही याचिका पहले हाई कोर्ट में दाखिल की थी जिसे हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसा एक मामला सुन रहा है। सुप्रीम कोर्ट पीठ ने कहा कि वह इस याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।

 

 

याचिका में मांग की गई थी कि कोर्ट दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार व अन्य अथॉरिटीज को आदेश दे कि वे कोरोना मरीजों की पहचान धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर न करें। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों का कहना था कि किसी बीमारी को किसी धर्म विशेष से जोड़कर कैसे देखा जा सकता है। याचिका में यह भी कहा गया था कि विभिन्न मीडिया चैनलों, वेबसाइटों आदि को कोरोना मरीजों की सूचना का प्रसार भी धर्म के आधार पर करने से रोका जाए। ऐसी वेबसाइटों को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक किया जाए। हालांकि कोर्ट याचिका से प्रभावित नहीं हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: