मेरठ के कोठे पर थी 20 साल की शबिना, एक दिन पहुँच गया उसके गाँव का लड़का, फिर शुरू हुआ ग्राहक वला खेल और निकाल लाया उसको बाहर

दिल्ली ncr के मेरठ का कबाड़ी बाजार या रेड लाइट एरिया, यह एक ऐसी जगह है जहां आज भी लोग भूल कर भी कदम नहीं रखना चाहते फुलस्टॉप एक ऐसी खौफनाक जगह, जहां आज तक अनगिनत लड़कियों की जिंदगी को तबाह करने का मंजर, व्यापार के नाम पर चलाया जाता है। यहां के अंधेरे कमरों में इन मासूमों की जिंदगी या कब दम तोड़ देती हैं, पता भी नहीं चलता। गौरतलब है कि, 3 साल पहले हाईकोर्ट के आदेश पर इस क्षेत्र के सभी कोठों पर कार्यवाही करके पुलिस में ताला जड़ दिया था।

भले ही अब यहां जिंदगी यों को तबाह करने का व्यापार ना चलता  हो ,लेकिन वहां के बंद कमरों ने कई दर्द भरे राज अपने अंदर छुपाए हुए हैं, जो चीख-चीख कर  वहां की जिल्लत और मौत से भी बुरी जिंदगी  की दास्तां बयां करती है ।

जब जब पुलिस की छापेमारी पड़ती, तब तब जिंदगी यों को बर्बाद करने का यह घिनौना सत्य, वेश्यावृत्ति के रूप में सामने आता ।

पुलिस ने यहां से कई ऐसी लड़कियों को रेस्क्यू करवाया है, जिन्हें दूसरे शहरों से  खरीद कर लाया गया था या जिनका अपहरण कर लाया गया था। वहीं कई ऐसी भी कहानियां सामने आई ,जिन्होंने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

 

आइए एक नजर डालें, उन्हीं कहानियों पर जो किसी को भी झकझोर सकती हैं:-

अपने गांव की सबीना को देख वह शख्स रह गया दंग ।

पश्चिमी बंगाल के 24 परगना जिले की रहने वाली सबीना का कार सवार लोगों द्वारा अपहरण हो जाता है, जब वह अपने घर से किसी काम से बाहर जा रही थी। अपहरण के बाद कोलकाता के एक मकान में, जहां उसके जैसी और भी लड़कियां थी, सबीना को नशीला पदार्थ देकर 3 दिन तक रखा गया। मेरठ के कबाड़ी बाजार के एक कोठे पर बेच कर, यातनाएं देकर, जबरदस्ती वेश्यावृत्ति के व्यापार में धकेल दिया गया।

 

 

यह सब सबीना के लिए खौफनाक सपने जैसा था, एक ऐसा सपना जो कब खत्म होगा किसी को नहीं पता। पर एक दिन जब सबीना कोठे की छत पर  थी, उसने अपने गांव के जान- पहचान के एक लड़के को देखा। उसे देखकर मानो उसे राहत की सांस मिली हो । उस लड़के ने भी उसको पहचान लिया था और उसे वहां उस हालत में देखकर दंग रह गया था। यह लड़का मुजफ्फरनगर के एक सराफ  के पास काम करता था। जब भी वह सराफा बाजार जाता ,यहां से हमेशा गुजरता था। लड़के के कुछ करने से पहले, सबीना ने खुद हिम्मत करके लड़के तक एक चिट्ठी  फेंकी।  जिसे लड़के ने उठा लिया।

 

#  ऐसे बाहर निकली सबीना उस नर्क से l

जब उस लड़के ने चिट्ठी खोलकर पड़ा। तब वह कुछ समझ नहीं पाया,  उसमें लिखा था, आज रात 8:00 बजे ग्राहक बनकर कोठे पर आना। जब वह लड़का 8:00 बजे वहां पहुंचा, तो  सबीना  ने उसे सब बता दिया, कि आखिर कैसे हुआ यहां पहुंची और उससे इस नर्क से छुटकारा दिलाने को भी कहा। वह शख्स अगले दिन फिर रात 8:00 बजे ग्राहक बनकर पहुंचा ,वहां उसने सबीना की आपबीती को फोन में रिकॉर्ड कर लिया। रिकॉर्डिंग को लेकर वह लड़का स्थानीय दुकानदार के नौकर के साथ “एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट” थाने में पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी। जिसके बाद सबीना को उस नर्क से आजाद कराया गया। 20 साल की सबीना ने तो जैसे उस नर्क से निकलने की उम्मीद तक छोड़ दी थी। पर आखिर उसकी चालाकी और लड़के की अकल मंदी से उसे उस घटिया जिंदगी से छुटकारा मिला।

Leave a Reply