दिल्ली सरकार ने राजधानी में वायु प्रदूषण के गंभीर संकट से निपटने के लिए कमर कस ली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार ने अगले चार वर्षों के लिए एक व्यापक और महत्वकांक्षी कार्य योजना तैयार की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक मोड पर शिफ्ट करना, सड़कों की स्थिति सुधारना और दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाना है। इसके लिए सरकार ने भारी बजट और सख्त समय सीमा निर्धारित की है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बड़ा बढ़ावा
परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर सबसे अधिक जोर दिया है। सरकार की योजना के अनुसार:
- वर्ष 2026 से पहले दिल्ली की सड़कों पर 7,700 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में शहर में लगभग 3,600 ई-बसें संचालित हैं।
- ईवी इकोसिस्टम को सपोर्ट करने के लिए चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार किया जाएगा। सार्वजनिक चार्जिंग और बैटरी-स्वैपिंग पॉइंट्स की संख्या मौजूदा 9,000 से बढ़ाकर 36,000 करने की योजना है।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए ‘स्मार्ट प्राइसिंग’ के साथ नई पार्किंग नीति लागू की जाएगी।
सड़कों का कायाकल्प और ट्रैफिक प्रबंधन
धूल से होने वाले प्रदूषण (Dust Pollution) को नियंत्रित करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए बुनियादी ढांचे में बड़े बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का शुरुआती वित्तीय आवंटन भी मंजूर किया गया है।
- सरकार ने 6,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरी दिल्ली में 3,300 किलोमीटर से अधिक सड़कों का पुनर्निर्माण या सुधार करने का निर्णय लिया है। इसमें पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और अनधिकृत कॉलोनियों की सड़कें शामिल हैं।
- ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए 62 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है। इनमें से 30 स्थानों पर सुधार कार्य शुरू भी हो चुका है।
- यातायात प्रबंधन में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की सहायता के लिए 1,200 डीटीसी कर्मचारियों को विशेष रूप से तैनात किया गया है।
हरियाली और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्रदूषण के खिलाफ इस लड़ाई में प्रकृति और विज्ञान दोनों का सहारा लिया जा रहा है। सरकार ने दिल्ली के ‘ग्रीन कवर’ को बढ़ाने के लिए एक बड़ा लक्ष्य रखा है।
- अगले चार वर्षों में दिल्ली के रिज इलाके और अन्य स्थानों पर 35 लाख पेड़ लगाने की योजना है। इसमें से 14 लाख पेड़ इसी वर्ष लगाने का लक्ष्य है।
- प्रदूषण के सटीक कारणों को समझने के लिए जनवरी 2026 से टेरी (TERI), आईआईटी दिल्ली और आईआईटीएम पुणे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करेंगे।
दिल्ली सरकार की यह पहल प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। 10-वर्षीय ऑपरेशनल मॉडल और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार से न केवल हवा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि आम जनता को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधा भी मिलेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीआर में प्रदूषण को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए अभी और बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।
Last Updated: 17 January 2026